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बर्फानी बाबा अमरनाथ की यात्रा-दर्शन पर असमंजस बरकरार

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अजीत कुमार पाण्डेय

प्रदेश आजतक : बाबा अमरनाथ यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति अब भी बरकरार है. अब लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ने के बाद यात्रा का एडवांस पंजीकरण फिलहाल टलने की संभावना दिख रही है. 23 जून से आरंभ होने वाली इस यात्रा के श्राइन बोर्ड ने लॉकडाउन के चलते एडवांस पंजीकरण पर फैसला पहले ही चार मई तक टाल दिया था. वर्तमान हालात को देखते हुए कुछ संगठन यात्रा टालने की मांग निरंतर उठा रहे हैं.उधर, यात्री न्यास यात्रा टालने पर कतई सहमत नहीं हैं. वह इस संबंध में उपराज्यपाल को कई सुझाव भी दे चुके हैं. फिलहाल, श्राइन बोर्ड हालात की समीक्षा कर रहा है. वहीं सूत्र बताते है कि श्री अमरनाथ की यात्रा के आयोजन को लेकर फैसला मई के अंत में हो सकता है.

यात्रा मार्गों पर लंगर का आयोजन करने वाले अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन पंजीकरण व परिवहन की चुनौतियों को देखते हुए इस साल यात्रा के आयोजन के हक में नहीं है. संगठन इस बात के लिए उप राज्यपाल से अनुरोध कर रहा है कि मौजूदा हालात में यात्रा को केवल पारंपरिक रीति रिवाज पूजा अर्चना तक सीमित कर देना चाहिए. छड़ी मुबारक साधु संतों के साथ रवाना की जाए.

संगठन के महासचिव राजन गुप्ता ने कहा कि वह प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल जीसी मुर्मू को पत्र लिखकर यह सुझाव दे चुके हैं. हमने पवित्र शिवलिंग के दर्शन ऑनलाइन या फिर टीवी चैनल के माध्यम से प्रसारित करने का अनुरोध किया है.

वहीं, बाबा अमरनाथ और बाबा बुड्डा अमरनाथ यात्री न्यास यात्रा को स्थगित करने पर सहमत नहीं है. न्यास के प्रमुख पवन कोहली ने कहा कि यात्रा की अवधि में कटौती की जा सकती है. ऐसे में हेलीकॉप्टर की उड़ानों की संख्या बढ़ाने का विकल्प भी हमने उप राज्यपाल को दिया है. पंजीकरण की भीड़ से बचने का विकल्प ऑनलाइन पंजीकरण है.

क्या है परेशानी

लंगर संगठनों का तर्क है कि डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ और प्रशासन कोरोना से जंग में जुटे हैं. ऐसे में पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनवाना चुनौती है. बैंकों में पंजीकरण, आधार शिविरों में शारीरिक दूरी बनाए रखना भी कठिन होगा. यात्रियों को रेलवे और एयर टिकट बुकिंग करवाने में भी मुश्किल होगी.

यह हो सकते हैं विकल्प

वर्तमान हालात में यात्रा देरी से आरंभ करने का विकल्प है. ऐसे में यात्रा को जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू किया जा सकता है. श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण एक विकल्प हो सकता है. श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रखी जा सकेगी. इस दौरान यात्रा के लिए हेलीकाप्टर की उड़ानों को बढ़ाया जा सकता है.

यात्रा को प्रथम पूजा और समापन तक सीमित किया जा सकता है. छड़ी मुबारक को परंपरागत पूजा के साथ कुछ संत लेकर जाएं. श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दर्शन करने की व्यवस्था हो सकती है या फिर टीवी चैनल के माध्यम से पवित्र गुफा के लाइव दर्शन करवाए जा सकते हैं.वैष्णो देवी की आरती का लाइव प्रसारण किया भी जाता रहा है.

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