- Advertisement -

- Advertisement -

बलिया : काेराेना की मार से बेजार हुआ रसड़ा बाजार

दुकानें बंद हाेने से डंप है लाखाें का माल, पूंजी फंसी

0

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

रिपोर्ट : रवि आर्य

 

प्रदेश आजतक : (बलिया) पूरे देश में कोविड-19 की मार से कोई अछूता नहीं है. यही वजह है कि केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया है. भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कोरोना के प्रकोप को सीमित करने के लिए पूरी तरह से लॉकडाउन की घोषणा की है. देश में इस लॉकडाउन के दौरान सभी लोगों को घर पर ही रहने की हिदायत दी गई है. इस दौरान लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक है. कुछ जरूरी सामान और सेवाओं के अलावा बाकी सभी कारोबार और इंडस्ट्री में भी ताले लग गए है.

यही कारण है कि जितने भी उद्योग, व्यवसाय है सब ठप पड़ गए और उनमें काम करने वाले लोग भी बेरोजगारी की कगार पर आ खड़े हुए है. यही कारण है कि लोगों का पलायन फिर से एक बार अपने-अपने स्थानीय क्षेत्रों की तरफ हुए है. दूसरे क्षेत्रों की तरह ही उद्योग धंधों पर अचानक लॉकडाउन की मार ने एक तरह से इसकी कमर तोड़ने जैसी स्थिति बना दी है. कोरोना संक्रमण की वजह से देश में लॉकडाउन है. इस लाॅकडाउन में हर व्यापारी हर तरीके से टूट रहा है.इस वक्त बात करें ताे अप्रैल- मई में सबसे अच्छा व्यवसाय हाे ताे वाे है कपड़ा.माहे रमजान में लॉकडाउन ने कपड़ा व्यवसायियों को तगड़ा झटका दे दिया है.

ईद के मौके पर दुकानदारी करने की मंशा से तैयारी कर रखे व्यापारियों की कमर टूट चुकी है. कारण है कि साल भर में सबसे अधिक कमाई वाले इस माह में जहां इस बार बोहनी होने की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है. करोड़ों का माल दुकानों में डंप है तो कुछ व्यापारियों के माल ट्रांसपोर्ट में फंसे हैं. उधर दो माह पहले ही माल की बुकिग कराने वाले दुकानदार पूंजी फंसाकर हाथ मलने को विवश हैं. माह रमजान कपड़ा व्यवसाय के लिए बेहद अहम माना जाता है. प्रत्येक मुस्लिम परिवार में नए कपड़े की खरीदारी होती है. इसे देखते हुए दुकानदार काफी पहले से तैयारी शुरू कर देते हुए. नए वेरायटी व डिजाइन के कपड़ों को स्टोर करने लगते हैं, जिससे अधिक से अधिक ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके.

बालाजी स्कूल

इस बार तैयारी में लगे व्यवसायियों को लॉकडाउन में झटका दे दिया. प्रदेश आजतक के जिला संवाददाता रवि कुमार की टीम ने कपड़ा व्यवसायियाें का हाल जाना ताे व्यवसायियाें का कहना है कि लाॅकडाउन व काेराेना ने व्यवसाय की हालत बद से बत्तर कर डाली है. प्रमुख कपड़ा व्यवसायी स्टेशन राेड़ रसड़ा सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि रमजान में व्यवसाय के लिए उन्होंने नये-नये कपड़े स्टोर कर रखे थे. माल के बंडल खोलने का अवसर भी नहीं मिला. सारा माल डंप है. दुकानें खोलने की अनुमति नहीं मिली तो सारा माल डंप रह जाएगा. पूरी पूंजी फंसी रह जाएगी.

मार्च से जून तक स्कूल यूनिफाॅर्म और शादियाें के सीजन से कपड़े बड़े मात्रा में बिकते हैं, लेकिन साल का सबसे बड़ा सीजन भी पिट गया. रसड़ा,रेडिमेट वस्त्राें के विक्रेता शिवम् अग्रवालजी का कहना है कि नवरात्र, रमजान और शादी के सीजन के लिए कपड़ों का जो स्टाक खरीदा था, अब उसके दीपावली में ही निकलने के आसार हैं.
लॉकडाउन से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में लंबा समय लग जाएगा. इन दिनों शादी, रमजान का सीजन आने की वजह से झूमकर खरीदारी की जाती है. महज पंद्रह दिन मतलब, 15 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच में ही काेलकत्ता, कानपुर से मंगाए कपड़ों के स्टाक में लगभग 25 प्रतिशत की खरीददारी हो जाती है.

लेकिन, इस बार 22 मार्च से ही जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन की शक्ल में  कोरोना का कहर बाजारों पर टूट पड़ा. व्यापारी फरवरी में होली के साथ ही अप्रैल में आने वाले रमजान त्योहार को देखते हुए कपड़ों का बड़ा स्टाक अपने पास मंगवा लेते हैं.रसड़ा व्यापारी शिवम् गाेयल का कहना है कि  होली में तो थोड़ी बहुत खरीददारी हुई भी, लेकिन दस दिन के बाद( 22 मार्च) से ही कोरोना का ग्रहण लग गया है. इससे अप्रैल में आने वाले रमजान का व्यापार खासा प्रभावित हुआ. इसी बीच शादी की खरीददारी का वक्त बीत ही गया. 25 अप्रैल से रमजान और आगे शादी की तैयारियों का सीजन. शादी और ईद में शहर में लाखाें रुपये का व्यापार होता है.

व्यापारी अंकित गर्ग का कहना है कि काेराेना को लेकर जिस तरह से पाबंदियां हैं, उससे व्यापारियों को शादी के सीजन से भी बहुत उम्मीद नहीं है. व्यापारियों को अब इस स्टाक के दीवाली पर ही निकलने की उम्मीद है. हालांकि लॉकडाउन के चलते जिस तरह से जेबों पर मार पड़ी है, उससे दीपावली पर भी कोई बड़ा चमत्कार होने की उम्मीद नहीं है. कोरोना की वजह से रमजान की तैयारियों को लेकर होने वाली खरीददारी पर ग्रहण लग गया है. ईद के मॉडल वाले कपड़े त्योहार खत्म होने के बाद नहीं खप पाते हैं। इससे कपड़ा व्यापारियों को करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. अब हालात समान्य होने पर शादी के सीजन में मांग देखकर ही बाजार का कुछ अनुमान लग सकेगा. इसी तरह शहर के अन्य कपड़ा व्यवसायियाें काे तगड़ा झटका लगा है.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments
Loading...