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कानपुर : लॉक डाउन से आर्थिक संकट में घिरे रिक्शा चालक ने लगाई डीएम से मदद को गुहार

डी एम को ट्वीट कर दी थी जानकारी पर नहीं आई कोई मदद

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डेस्क

 

प्रदेश आजतक : कानपुर कोरोना वायरस के चलते किए गए शहर में लॉक डाउन से उन लोगों के जीवन में दो वक़्त का खाना जुटाना बहुत मुश्किल हो गया है जिनको रोज बाजार खुलने से ही कड़ी मेहनत कर रात तक चंद पैसे इकट्ठा होते थे. ऐसा ही एक मामला शहर के नगर निगम सीमा अन्तर्गत वार्ड 72 दबौली से प्रकाश में आया. यहां मकान संख्या 47/ई/12, दबौली में रहने वाले एक ई रिक्शा चालक कान्ति ने अपनी आर्थिक संकट की समस्या से जूझते हुए मदद की गुहार लगाते हुए डी एम कानपुर को एक ट्वीट भेजा और अपनी समस्या बताई.

कान्ति के मुताबिक वे एक बैटरी चालित ई कार्ट के चालक हैं और क्षेत्रीय बाजार के दुकानदारों द्वारा सामान को लाने व ले जाने का कार्य करते हैं उनको भाड़े के रूप में कभी 50 कभी 100 या कभी 150 रूपए ही मिलते हैं रात भर मेहनत करने पर बाजार में काम के अनुसार चार से पांच सौ बनते थे, जिससे कि गाड़ी व किराया आदि अन्य खर्च निकालने के बाद घर में रोटी का जुगाड हो पाता था.यानी कि इनकी आर्थिक स्थति रोज कमाने पर ही निर्भर है.

लॉक डॉउन होने से उनके समक्ष अब दो वक़्त की रोटी का बंदोबस्त करना भी मुश्किल हो गया है. इस तरह के शहर में हजारों परिवार हैं जो कि दिहाड़ी मजदूरी या ई रिक्शा से जैसे तैसे गुजर बसर कर रहे हैं पर ऐसे शहर में बाजार बन्द होने से उनके जीवन में भूखमरी संकट आना लाजिमी है, सरकार द्वारा घोषणाएं की गई पर जमीनी स्तर पर कोई सहायता उन तक नहीं पहुंच रही.

डी एम कानपुर को भेजे ट्वीट को देखकर कहीं न कहीं एक आम आदमी की इस पीड़ा से संघर्ष करते मानव जीवन की वास्तविकता भी प्रलक्षित होती है, कि जहां एक ओर कानपुर को मेट्रो सिटी बनाने के लिए कई हजार करोड़ रुपए सरकार द्वारा बड़ी बड़ी कंपनियों को दिए जा रहे हैं वहीं दो वक़्त की रोटी के जुगाड को बाजार में संघर्ष करते हजारों की संख्या में ऐसे लोग है जिनके इस छोटे छोटे कामों व सहयोग से ही व्यापार जगत तरक्की की उंचाई तय करता है.

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