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कैमुर : स्मार्ट सिटी नहीं, स्मार्ट विलेज के लिए चर्चा में आया जमुरना

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रिपोर्ट : राजन कुमार

 

प्रदेश आजतक : देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वाराणसी को स्मार्ट सिटी का स्वरूप प्रदान किया जा रहा है. सरकार के इस मुहिम में अभी कुछ वक्त लगने हैं. लेकिन यहां रामगढ़ प्रखंड की नरहन जमुरना पंचायत स्मार्ट विलेज का रोल मॉडल बन गई है. जहां सारी सुविधाएं लोगों को घर बैठे मुहैया हो रही है. रात में भी दिन का एहसास यहां के लोग करते हैं. इस कार्य को कोई सांसद, मंत्री व विधायक ने नहीं बल्कि पंचायत के मुखिया डॉ संजय सिंह ने कर दिखाया है. जिस कारण लोग अब इस पंचायत की ओर विमुख होने लगे हैं. गुजरे दिनों की बात है जब लोग शहर की सुख सुविधा देख गांव से नाता तोड़कर शहर की ओर विमुख हो रहे थे.

लेकिन समय के साथ भाग्य ने ऐसा करवट बदला कि जमुरना के लोग अब शहर छोड़कर गांव की तरफ ध्यान देना शुरू कर दिए हैं. जमुरना गांव को घिरनी रोड बनाकर फेवर ब्लाक से जोड़ एक नई पहल ने अन्य को भी आकर्षित कर दिया. गली से लेकर सड़क को इंटरलॉकिग किया गया है. इस रोड के खुबसूरती के लिए किनारे बिजली के खंभों पर लगी लाइटें इस विकास में चार चांद लगा रही है. जिसका संचालन एक जगह से रिमोर्ट से होता है. यानी इस पंचायत में अनावश्यक लाइट नहीं जलती. जपानी तकनीक पर आधारित इस गांव को स्मार्ट विलेज बनाकर मुखिया ने एक नया किर्तिमान स्थापित किया.

कुछ वर्ष पहले एक बालक श्रेयांस का जब इस गांव से अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई. तब अपहरणकर्ताओं को चिह्नित करने में पुलिस को परेशानी हो रही थी.यहदेख मुखिया ने गांव को सीसीटीवी कैमरा से जोड़ने की घोषणा की. अब यही जमुरना तीसरी आंख से लोगों की निगहबानी कर रहा है. जहां से चोरी छिनैती जैसी घटनाएं अब यहां सुनी नहीं जा सकती. मुख्य सड़क से गांव तक पक्की सड़क बन गई है. छोटा टोला हो या अजा बस्ती सभी घरों में बिजली शौचालय व नल का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है.

यही नहीं मिनरल वाटर यानी आर ओ प्लांट लगाकर एपीएल वालों को पांच व बीपीएल धारकों को तीन रूपए में बीस लीटर पानी भी दिया जाता है. लड़कियों की शादी में यह कार्य फ्री में होता है. फेवर ब्लाक से बनी गांव की सड़क के दोनों किनारे वृद्ध व बुजुर्गों के बैठने के लिए जगह जगह चेयर व पीने के पानी के लिए टोटी लगी हुई है. इसके अलावा इसकी खूबसूरती और ज्यादा दिखे उसके लिए नारियल व बोटल पाम जैसे बेसकीमती पौधे लगाए गए हैं. इस तरह के पौधे बड़े बड़े सरकार भवनों में शहरों में देखने को मिलता है. पंचायत के सभी आठ वार्डों में लगे नलजल से लोगों के घरों में शुद्ध पानी सप्लाई निरंतर हो रही है.

जिले में फागिग मशीन भले ही नहीं है. लेकिन यहां फागिग मशीन से सप्ताह में छिड़काव करा मलेरिया मुक्त पंचायत बना दिए हैं. क्या कहतें हैं मुखियाडॉ संजय सिंह ने कहा कि यह सब जनता के सहयोग व आशीर्वाद से संभव हुआ है. मैं मुखिया बना तभी सोचा था कि स्मार्ट सिटी नहीं स्मार्ट विलेज का सपना पूरा करुंगा. फंड में पैसा भले ही नहीं रहता है लेकिन मैं मृतक के लिए कबीर अंत्येष्टि से तीन हजार देता हूं. विकास के लिए कोई भेदभाव नहीं किया. क्या कहतें हैं पदाधिकारी- नरहन जमुरना पंचायत का कार्य बेमिसाल है. यहां के मुखिया से अन्य जगहों के मुखिया को सीख लेनी चाहिए. विकास कार्य करने वाले प्रतिनिधियों को पैसे की कमी नहीं होती. ऐसे मुखिया को पुरस्कृत करने पर विचार किया जाएगा.

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