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गाजीपुर : 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ संस्कार महोत्सव शुरू, निकाली गई भव्य कलश यात्रा

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रिपोर्ट सत्या उपाध्याय

 

प्रदेश आजतक : गाजीपुर में आज अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में चल रहे 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के प्रथम दिन यज्ञ स्थल ,लंका मैदान से गायत्री परिवार के प्रज्ञा मंडल, महिला मंडल, एवं युवा मंडल की माताओं- बहनों  के द्वारा एक भव्य कलश यात्रा एवं शोभायात्रा दिव्य झांकियों के साथ प्रातः 10:00 बजे यज्ञ स्थल से निकाली गई. गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी विद्यासागर उपाध्याय ने बताया कि प्रातः 10:00 बजे से यज्ञ स्थल पर एकत्रित सभी पीत वस्त्र धारी माताओं ने सिर पर कलश रखकर सभी देवताओं का आवाहन किया.

मंत्रोचार के बीच नगर पालिका अध्यक्ष सरिता अग्रवाल एवं विनोद अग्रवाल ने झंडारोहण कर भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परंपरा को पराकाष्ठा पर ले जाने पर गायत्री परिवार के संस्थापक गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता एवं आभार भी प्रकट किया तथा तत्पश्चात कलश यात्रा यज्ञ स्थल से अपनी भव्यता को लिए मूर्ख मुख्य मार्ग से नगर की तरफ बढ़ते हुए हाथों में जलते मशाल लाल मशाल सबसे आगे चलते हुए, मंगल कलश यात्रा का प्रतिनिधित्व करते हुए, भव्य झांकियों के साथ कलश यात्रा निकाली गई.

कलश यात्रा के दौरान पर्यावरण जागरूकता हेतु तरुण वृक्ष हाथों में लेकर प्रज्ञा मंडल ,महिला मंडल के माताओं बहनों ने गुंजायमान मंगल गीतों के बीच व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण से संबंधित गगनभेदी नारों से, ‘हम बदलेंगे- युग बदलेगा ,हम सुधरेंगे -युग सुधरेगा ,नया सवेरा नया उजाला- इस धरती पर लाएंगे, इन नारों से युवा प्रकोष्ठ के भाइयों बहनों ने जनपद वासियों को जीवन दायिनी संदेश दिया.कलश यात्रा मिश्र बाजार होते हुए लाल दरवाजा के रास्ते स्टिमर घाट से वापस कलेक्टर घाट पहुंचकर माताओं बहनों ने जल भरण का कार्य संपन्न किया. तत्पश्चात महुआबाग के रास्ते पुनः लंका, यज्ञ स्थल पर कलश का भव्य स्वागत पुष्प वर्षा एवं जलसिंचन से किया गया.

कलश यात्रा को संबोधित करते हुए मुख्य प्रबंधक ट्रस्टी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि” सिर पर कलश धारण से घर का सुख सौभाग्य जगता है, दोष दुर्गुण का नाश होता है।घर में संस्कारों का जागरण होता है. आज की सबसे बड़ी विडंबना है व्यक्ति में बदलते हुए विचार और बिगड़े हुए विचार और विचारों के शोधन के लिए तथा इस धरती पर स्वर्ग जैसी परिस्थितियां पुनः दोबारा निर्मित हो, इस उद्देश्य से जन-जन तक सद ज्ञान एवं सत्कर्म दोनों व्यक्ति के विचारों को शुद्ध करने के लिए गायत्री का अवलंबन  का आधार बनाते हुए आज मानवीय जीवन के प्रथम आवश्यकता है.

इस क्रम में युग गायक रविंद्र शास्त्री ने जनपद के युवाओं को संगीत एवं उद्बोधन के माध्यम से गायत्री एवं यज्ञ के आधार पर पुनः राष्ट्र को विश्व गुरु बनाने को आवाहन किया.कार्यक्रम को सफल बनाने में राम किशोर राय, आनंद सिंह, प्रेम तारा तिवारी ,माधुरी सिंह, संजय तिवारी, ममता सिंह ,क्षितिज श्रीवास्तव, प्रवीण राय, प्रगति सिंह ,प्रतिभा ठाकुर ,आकांक्षा, ओम नारायण राय, पवन, संतोष, मनोज जायसवाल, विजय प्रजापति ,राम सिंह जीएवं गायत्री परिवार के परिजनों का सहयोग रहा.

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