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बक्सर : भटके को दिशा दिखाती है भागवत कथा – आचार्य रत्नेश जी

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रिपोर्ट : संतोष चौबे

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प्रदेश आजतक : बक्सर : श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को कथा भाष्कर जगद्गुरु रत्नेश आचार्य जी महाराज ने कहा कि अशांत को शान्ति, अतृप्त को तृप्ति व भटके को दिशा भागवत कथा से प्राप्त होती है और आनन्द चाहिए तो सच्चिदानन्द से जुड़ना पड़ेगा. ये बातें नया बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के प्रांगण में आयोजित’12वें श्रीप्रिया-प्रियतम मिलन महोत्सव कार्यक्रम के तहत कहीं. कार्यक्रम उक्त आश्रम के संस्थापक साकेतवासी पूज्य संत नारायणदास भक्तमाली उपाख्य मामा जी की स्मृति में आयोजित किया गया है. महोत्सव में भागवत कथा कार्यक्रम अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक हो रहा है. जहां आचार्य श्री ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में दुनिया को स्थायी समाधान अध्यात्म ही दे सकता है, यह विश्व का सर्वोपरि विज्ञान है.

भौतिकता की अंधी दौड़ में भटकती मानवता को भागवत की कथा ही सच्ची दिशा दे सकती है. बाहरी दुनिया से सच्चा आनन्द और संतोष प्राप्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि यह अस्थाई है और लगातार बदल रहा है, उसे पाने की चाह केवल समय की बर्बादी है। धन से भौतिक सुख हासिल किया जा सकता है पर आनंद नहीं. इस क्रम में समझाते हुए कहा कि इंसान भले मंगल ग्रह तक पहुंच गया है लेकिन मन के अंदर के मंगल को कभी भी जानने का प्रयास नहीं करता है, जिस कारण उसे दुखों का सामना करना पड़ रहा है. सच्चा आनंद बाहर नहीं है बल्कि स्वयं के अंदर है. जिस दिन मनुष्य स्वयं को जान जाएगा वह कभी निराश नहीं होगा.

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