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मानव तन पाकर ईश्वर भक्ति नहीं की तो जीवन व्यर्थ : शास्त्री

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रिपोर्ट : रामाश्रय बिंद

 

प्रदेश आजतक : सेनभद्र मछरमारा गांव में बाबा मछन्दर नाथ मन्दिर पर आयोजित सप्त दिवसीय सत चण्डी यज्ञ के छठवे दिन भी कथा वाचिका अराधना शास्त्री ने अपने संबोधन में भागवत मानस कथा संगीतमय प्रवचन में भक्ति रस की मंदाकिनी प्रवाहित करते हुए. श्रद्धालुओं के बीच कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद जब जीव का युग युगान्तर, काल कालांतर एवं जन्मांतर का पूण्य जागृत होता है, तो उसे मानव तन प्राप्त होता है.

और अगर जीव इस मानव तन को प्राप्त करके भी ईश्वर की भक्ति न कर पायें तो जीवन व्यर्थ है. उन्होंने इस संसार में मनुष्य को अपना वास्तविक लक्ष्य भूल जाता है. मनुष्य वास्तविक लक्ष्य तभी जान पायेगा जब वो कथा में आये संतों के सान्ध्यि में रहें. बिना संतसंग के मनुष्य का विवेक जागृत नहीं हो सकता है. और ये कथा कब मिलेगी जब हमारे उपर बाबा जी का कृपा होगी. आज के वर्तमान समय में काल ईश्वर की कथा श्रवण करना अत्यंत आवश्यक है.

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