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सोनभद्र : अक्षय तृतीया पर दान से अक्षय पुण्य के भागी बनेे हजारों श्रद्धालु

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रिपोर्ट : रामाश्रय बिंद

 

प्रदेश आजतक : अक्षय तृतीया पर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज पर बतौर मुख्य यजमान तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं. चण्डी प्रसाद मिश्र ने भगवान परशुराम का विधिपूर्वक पूजन अर्चन किया. पूजन पुरोहित प्रमोद शुक्ल ने कराया. साथ में आए अधीक्षण अभियन्ता इं. एमएल पांडेय, अधिशाषी अभियन्ता इं. दिवाकर शुक्ल, अनुराग मिश्र आदि ने पूजन किया. इस मौके पर भगवान परशुराम की अवतरण और अक्षय तृतीया के महत्त्व पर विशद चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम के जन्मोत्सव में परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य है.

सौभाग्यवती स्त्रियाँ व क्वारी कन्याएँ गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं.गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं. इसी दिन जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी परशुराम का जन्म हुआ था. सीता स्वयंवर के समय परशुराम जी अपना धनुष बाण श्री राम को समर्पित कर संन्यासी का जीवन बिताने अन्यत्र चले गए.अपने साथ एक फरसा रखते थे, तभी उनका नाम परशुराम पड़ा.

वक्ताओं ने कहा कि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ का दिन भी है. अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घडे, कुल्हड, सकोरे, पंखे, खडाऊँ, छाता, चावल, नमक, घी, खरबूजा, ककड़ी, चीनी, साग,इमली,सत्तू आदि गरमी में लाभकारी वस्तुओं का दान पुण्यकारी है. इस दिन जिन-जिन वस्तुओं का दान किया जाएगा, वे समस्त वस्तुएँ स्वर्ग या अगले जन्म में प्राप्त होगी. इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा सफेद कमल अथवा सफेद गुलाब या पीले गुलाब से करना चाहिये. ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था. इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं.

प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं. वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं.इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था. इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता. कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ओबरा के अध्यक्ष नन्द लाल पाण्डेय ने किया. मौजूद लोगों में महामंत्री प्रभात पांडेय, महेन्द्र पाण्डेय, प्रमोद चौबे, रमापति द्विवेदी, राजेश मिश्र, कृष्ण कांत पाण्डेय, देवानन्द मिश्रा, कपूर चन्द पाण्डेय, महेश पाण्डेय, राजीव द्विवेदी, कृष्ण मोहन त्रिपाठी, ई. प्रेम चन्द्र मिश्र, सुधीर पाण्डेय, एसएन पाण्डेय, एके पाण्डेय, अरविंद पाठक सहित आदि शामिल रहे. प्रसाद विरतण से कार्यक्रम पूर्ण हुआ.

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