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महोबा : अस्तित्व खोने के कगार पर काशी विश्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना 11 सौ वर्ष पुराना काशीपुरा का शिवमंदिर

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रिपोर्ट : जतन सिंह

 

प्रदेश आजतक : भगवान् शिव पार्वती के विबाह महोत्सव पर बुंदेलखंड का जितना पुराना ऐतीहासिक शिवमंदिर खजुराहो का भगवान् मतंगेस्वर जी का है, उतना ही पुराना मंदिर काशी विश्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना 11 बर्ष पुराना काशीपुरा का शिवमंदिर -बताया जाता है. बर्तमान उत्तर प्रदेश के महोबा जिला के ब्लाक पनवाड़ी के काशीपुरा ग्राम में यह मंदिर है. इस मंदिर का निर्माण धसान नदी के पूर्वी भाग पर लच्छुरा बाँध के नीचे नदी किनारे विशाल बना हुआ है. इस मंदिर के निर्माण भी भूगौलिक दृष्टि से बहुत ही सुरक्षा से हुआ.

ऐसा कहा जाता है की इस क्षेत्र में भियावान जंगल था, तथा संतो साधुओ की सुरक्षा को लेकर यहाँ संत अपनी भक्ति करते थे. काशी पुरा ग्राम का नाम भी इसी मंदिर के इतिहास से जुड़ा है. बुंदेलखंड के समाजसेवी संतोष गंगेले कर्मयोगी तीन बर्षो से बुंदेलखंड क्षेत्र में भारतीय संस्कृति और संस्कारो, नैतिक शिक्षा को बचाने विभिन्न बिषयो को लेकर जन जाग्रति अभियान जगाने के लिए छतरपुर, महोबा, हमीरपुर, बाँदा, ललितपुर, झाँसी, टीकमगढ़ ,पन्ना ,सतना दमोह,सागर आदि जिला में मोटर साईकिल से भ्रमण करते है.

इसी दौरान महाशिवरात्रि पर्व पर काशीपुरा गए. यहाँ के बुजुर्ग श्री आयोध्या प्रसाद अरजरिया , जागेस्वर प्रसाद , हरिशंकर , रामप्रसाद रमेश प्रसाद अरजरिया, मकबूल हकीम आदि से बात करने पर बताया की जो मंदिर काशीपुरा में बना है, बैसा ही मंदिर बनारस वाराणसी में बना है. देश में मंदिर एक जैसे है. देश के आजादी के बाद इस मंदिर की किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक मदद न मिलने के कारण मंदिर खंडहर में तव्दील होने लगा है.मंदिर के भण्डार कक्ष तथा सुरक्षा दीवाल गिर चुकी है. जो भक्त दर्शन करने आते है वह अपनी ओर से कुछ सुधार करवा रहें है.

बुंदेलखंड के समाजसेवी संतोष गंगेले कर्मयोगी ने उत्तरप्रदेश सरकार से अनुरोध करते हुए कहा की इस मंदिर की यदि तत्काल सुरक्षा और सुधार की और ध्यान नही दिया गया तो बुंदेलखंड का प्रसिद्ध दार्शनिक, धार्मिक आस्था का केंद्र काशीपुरा मंदिर ध्वस्त हो जायेगा तथा बाहुबलिओ के कब्जे में हो जायेगा. इसलिए पनवाड़ी ब्लाक प्रमुख,क्षेत्रीय विधायक,सांसद,राजकीय अधिकारी,जनपद अधिकारी इस मंदिर को भारत सरकार पुरातन विभाग,राज्य संस्कृति विभाग को अधिग्रहण करना चाहिए. महाशिवरात्रि पर्व पर इस मंदिर पर पुताई सफाई तक न होने से भक्तो और क्षेत्रीय भक्तो में सरकार के इस रवैया से गुस्सा है.

90 बर्षीय श्री बलराम चतुर्वेदी पुत्र पंडित श्री बदलू लंबरदार निवासी
रिपनौर बीहट ब्लाक पनवाड़ी जनपद महोबा से बुंदेलखंड के समाजसेवी संतोष गंगेले कर्मयोगी मुलाकात की. उन्होंने बताया की पनवाड़ी ब्लाक के विश्वामित्र झारखंड रिपनौर बीहट कोटरा क्षेत्र में भगवान श्री राम के गुरु विश्वामित्र एवं श्री दशरथ जी के गुरु वशिष्ठ जी की आस्था के केंद्र दशान नदी के बीच में दोनों गुरुओं की कुंडी बनी हूई है. जहां पर वर्ष में दो बार मकर संक्रांति एवं कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है.

यह स्थान महोबा जनपद के एवं झांसी जनपद के दोनों क्षेत्र में आता है. यहां पर संत महात्माओं और आस्था से भक्ति में पूर्ण व्यक्ति आते हैं. यहां पर एक मंदिर श्री हनुमान जी का है, जो काफी प्राचीन बताया जाता है. इस मंदिर के पास दो बरगद के पेड़ जो लगभग 1100 वर्ष पुराने बताए जाते हैं. जिनकी शाखाएं बहुत ही जमीन में पहुंच चुकी है. सभी जगह संपर्क एवं भ्रमण किया कर जानकारी हासिल करने का मौका मिला इन दोना प्रसिद्ध धार्मिक स्थल केे बारे मेें.

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