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वाराणसी : बेहतर महिला स्वास्थ्य के लिए ज़ारी है स्वाती की मुहीम 

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रिपोर्ट : आशीष देव उपाध्याय

 

प्रदेश आजतक : विकास के इस आधुनिक दौर में जब अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी का सपना हर दूसरा युवा देखता है, ऐसे में कई युवा ऐसे भी है जिन्होंने खुद की बजाय समाज को वरीयता दी और इसे ही अपने करियर के रूप में चुना.बनारस की रहने वाली स्वाती भी एक ऐसी युवा है जिन्होंने सामाजिक कार्य को अपना करियर बनाया. यों तो स्वाती के पिताजी आनन्द कुमार सिंह ने अपनी ही तरह बेटी को प्रशासनिक अधिकारी बनाने का सपना देखा था. लेकिन लेखन-क्षेत्र में रूचि रखने वाली स्वाती ने सामाजिक कार्य के क्षेत्र को चुना और माता-पिता दोनों ने बेटी को हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया. स्वाती की मां रंजू सिंह ने शुरुआती दौर से ही उनके सामाजिक कार्य में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था.

स्वाती ने साल 2013 में बीएचयू (बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी) से बीए – सोशियोलॉजी ऑनर्स करने के बाद यहीं से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में साल 2015 में मास्टर्स किया. साथ ही, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स (नई दिल्ली) से इन्होंने मानवाधिकार में पीजी डिप्लोमा और इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी (नई दिल्ली) से मानवाधिकार की पढ़ाई की. इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी अखबार ‘जनसत्ता’ में इंटर्नशिप के बाद इन्होंने राजनीतिक हिंदी पत्रिका ‘शुक्रवार’ में कुछ समय तक सह-संपादक के तौर पर काम किया.इसके बाद, यह इंडियन एक्सप्रेस से निकलने वाले हिंदी बाल-अखबार में दो साल तक ‘नो योर लीडर’ कॉलम की स्तंभकार भी रही. मास्टर्स के दौरान लिखने के शौक की शुरुआत इन्होंने अपने ब्लॉग ‘प्रतिरोध की ज़मीन’ से किया और जनवरी, 2017 में इन्होंने अपनी पहली किताब ‘कंट्रोल Z’ लिखी. इस किताब के माध्यम से इन्होंने अलग-अलग क्षेत्र की इतिहास से लेकर वर्तमान तक की भूली-बिसरी कुल सत्रह शख्सियतों की कहानी पाठकों से साझा की. इसके साथ ही,इनकी लिखी कविताओं को ‘वृंदा काव्य संकलन’ (केबीएस प्रकाशन) और कहानी को ‘अट्ठारह कहानियों’ में शामिल किया गया.

सामाजिक कार्य में रुझान और मुहीम की शुरुआत

स्वाती ने मास्टर्स करने के दौरान ही घर पर माता जी के सहयोग से करीब पचास गरीब बच्चों को फ्री ट्यूशन देना शुरू किया. घरों में काम करने वाली महिलाओं के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए स्वाती सांस्कृतिक व शैक्षणिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करवाती. उन्होंने इस पहल से सामाजिक कार्य की शुरुआत की. इसके बाद, साल 2017 में स्वाती ने अपने प्रयासों की मुहीम-एक सार्थक प्रयास वेलफेयर सोसाइटी से बकायदा नींव रखी.

बीएचयू में पढ़ने वाले सात युवाओं (रामकिंकर कुमार, अंजनी कुमार, गौरव पांडेय, देवेश रंजन, आशुतोष सिंह और सविता उपाध्याय) के साथ स्वाती ने इस मुहीम की शुरुआत की. मुहीम के ज़रिए वह मुख्य रूप से ‘माहवारी/पीरियड’ के विषय पर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और किशोरियों के साथ काम कर रही है. पीरियड मंत्रा नामक अभियान के ज़रिए वे महिलाओं को माहवारी से संबंधित स्वास्थ्य, स्वच्छता और समाज में सदियों से इस मुद्दे पर बनी चुप्पी को तोड़ने का काम कर रही है.

अपनी इस मुहीम के बारे में बताते हुए स्वाती ने कहा कि ‘शुरुआती दिनों में मैनें अपने लेखन के ज़रिए लैंगिक भेदभाव, जेंडर, यौनिकता और महिला स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को हमेशा उजागर किया. पर एक समय के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि अपने विचारों को लेखन के साथ-साथ सरोकार से भी जोड़ने की ज़रूरत है. क्योंकि किसी भी बदलाव को स्थायी बनाने के लिए चिंतन और उसका क्रियान्यवन बेहद ज़रूरी है. इसी तर्ज पर मुहीम की शुरुआत की गई. पर ये कभी संभव नहीं हो पाता अगर मित्र रामकिंकर कुमार ने मेरे इस विचार को अपना साथ नहीं दिया होता.

उल्लेखनीय है कि अब तक बनारस के पांच ब्लॉक (काशी विद्यापीठ ब्लॉक, आराजी लाइन, सेवापुरी, चिरईगांव और चोलापुर) के करीब पचास से अधिक गांव तक यह मुहीम पहुंच चुकी है.

प्रयासों को मिल रहा सम्मान

साल 2017 में लेखन कार्य के लिए केबीएस पब्लिकेशन (नई दिल्ली) की तरफ से सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया है.

मुहीम के ज़रिए स्वाती सिंह को मासिकधर्म पर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए को उत्तर प्रदेश कन्या शिक्षा एवं महिला कल्याण तथा सुरक्षा की तरफ से आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें अनवरत अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है.इसके साथ ही सामाजिक कार्य के लिए स्वाती को आशा ट्रस्ट (नागेपुर, वाराणसी) की ओर से सम्मानित किया जा चुका है.साथ ही, स्वाती को उनके सामाजिक कार्य के लिए दिल्ली में काकासाहेब कालेलकर समाज सेवा सम्मान 2017 से सम्मानित किया जा चुका है. हाल ही में, उन्हें स्वतंत्र व सशक्त लेखन कार्य के लिए प्रतिष्ठित लाडली मीडिया सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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